Pournami June 2026 Date and Time: जून में पूर्णिमा कब है? जानिए सही तारीख, चंद्रोदय का सटीक समय और महालक्ष्मी पूजन के अचूक उपाय

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Pournami June 2026 Date and Time: जून 2026 में पूर्णिमा कब है? जानिए पंचांग के अनुसार व्रत की सही तारीख, चंद्रोदय का समय, धार्मिक महत्व और लक्ष्मी प्राप्ति के अचूक उपाय

1. प्रस्तावना: जून 2026 की पूर्णिमा तिथि का अलौकिक व आध्यात्मिक महत्व

Pournami June 2026 Date and Time: सनातन हिंदू धर्म, वैदिक ज्योतिष और भारतीय पंचांग की दिव्य गणना में पूर्णिमा तिथि (Pournami Tithi) का स्थान अत्यंत पावन, मंगलकारी और सर्वोच्च माना गया है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक चंद्र मास (Lunar Month) के शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन, जब आकाश में चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होकर पूर्ण रूप से दैदीप्यमान होता है, उसे ‘पूर्णिमा’ (Purnima) या दक्षिण भारत में ‘पौर्णमी’ (Pournami) कहा जाता है। यह वह पवित्र समय होता है जब पृथ्वी पर चंद्रमा की दिव्य किरणों के माध्यम से अमृत की वर्षा होती है। इस दिन जल तत्वों और आध्यात्मिक चेतना में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।

जैसे ही जून का महीना मध्य में पहुँचता है, देश भर के श्रद्धालु, व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाएं और सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन करने वाले भक्त इंटरनेट पर सक्रिय रूप से एक ही सवाल सर्च करने लगते हैं— Pournami June 2026 Date and Time (जून 2026 में पूर्णिमा कब है और इसका सही समय क्या है?)।

जून 2026 की पूर्णिमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व इसलिए भी अनंत गुना बढ़ जाता है क्योंकि इस समय उत्तर भारत और दक्षिण भारत के पंचांगों के अनुसार ज्येष्ठ मास (Jyeshtha Month) की पूर्णिमा तिथि पड़ती है। इसे ‘ज्येष्ठ पूर्णिमा’ या ‘वट सावित्री पूर्णिमा’ (Vat Savitri Purnima) भी कहा जाता है।

सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन अखंड सौभाग्य का वरदान देने वाला होता है, जबकि आर्थिक तंगियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह रात माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की महा-रात्रि होती है। इस विशाल और प्रामाणिक महा-लेख (Mega-Article) में हम जून 2026 में आने वाली पूर्णिमा की सटीक तारीख, मिनट-टू-मिनट समय, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, पौराणिक व्रत कथा और इस दिन किए जाने वाले अचूक उपायों का इन-डेप्थ (In-depth) विश्लेषण करेंगे।

📊 2. Quick Overview: जून 2026 पूर्णिमा मुख्य विवरण

Pournami June 2026 Date and Time: पाठकों और व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं की त्वरित जानकारी के लिए नीचे दी गई तालिका में पंचांग गणना के अनुसार जून 2026 की पूर्णिमा का मुख्य ज्योतिषीय विवरण प्रस्तुत किया गया है:

पंचांग घटकमुख्य विवरण (जून 2026)
तिथि का नामपूर्णिमा तिथि / पौर्णमी (शुक्ल पक्ष – 15वीं तिथि)
संबंधित हिंदू महीनाज्येष्ठ (Jyeshtha Month)
मुख्य खगोलीय घटनाचंद्रमा का 16 कलाओं से पूर्ण होना (चंद्रोदय का विशेष महत्व)
सर्वश्रेष्ठ धार्मिक कार्यवट सावित्री व्रत, सत्यनारायण कथा, गंगा स्नान, दान-पुण्य, लक्ष्मी पूजन
वर्जित कार्यतामसिक भोजन का सेवन, कलह-क्लेश, देर तक सोना, उधार का लेन-देन
विशेष ज्योतिषीय योगअमृत सिद्धि योग और गजकेसरी योग का दिव्य संयोग

3. पूर्णिमा का विज्ञान और ज्योतिषीय रहस्य: मानव मन और पृथ्वी पर प्रभाव

Pournami June 2026 Date and Time: पूर्णिमा तिथि केवल एक धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसके पीछे हमारे प्राचीन ऋषियों-मुनियों का गहरा खगोल विज्ञान (Astronomy) और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी सहमति जताता है।

क) वैज्ञानिक और गुरुत्वाकर्षण का दृष्टिकोण

Pournami June 2026 Date and Time: चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट स्थित खगोलीय पिंड है और पृथ्वी पर मौजूद जल तत्वों (Water Elements) पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। पूर्णिमा के दिन जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब और पूर्ण आकार में होता है, तब उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति (Gravitational Pull) अपने चरम पर होती है। यही कारण है कि समुद्र में इस दिन सबसे ऊंची लहरें (High Tides) उठती हैं।

चूंकि मानव शरीर में भी लगभग 70% जल तत्व होता है, इसलिए पूर्णिमा की रात को हमारे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स और हार्मोन्स में भी भारी उथल-पुथल होती है। जो लोग संवेदनशील स्वभाव के होते हैं, उनमें ऊर्जा का स्तर बहुत बढ़ जाता है। इसी ऊर्जा को सही और सकारात्मक दिशा देने के लिए शास्त्रों में उपवास रखने, ध्यान लगाने और मंत्रों का मानसिक जाप करने का नियम बनाया गया है।

ख) ज्योतिषीय महत्व और मानसिक शांति

Pournami June 2026 Date and Time: ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को ‘मन और माता’ का कारक ($🌙$) माना गया है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण शक्ति में होता है, जिससे मन अत्यंत बलवान और प्रफुल्लित रहता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र दोष है, जिसके कारण उसे हमेशा मानसिक तनाव, अनिद्रा (Insomnia) या घबराहट रहती है, तो पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने और उसकी रोशनी में बैठने से चंद्र दोष पूरी तरह समाप्त हो जाता है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

📅 4. Pournami June 2026 Date and Time: सटीक तारीख और शुभ मुहूर्त

Pournami June 2026 Date and Time: वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय सूर्योदय और चंद्रोदय की गतियों पर निर्भर करता है। जून 2026 में आने वाली पूर्णिमा तिथि की सही तारीख और समय का विवरण नीचे दिया जा रहा है:

क) पूर्णिमा तिथि प्रारंभ और समाप्त समय (Tithi Timing)

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: जून 2026 (शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि समाप्त होने पर)
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: जून 2026 (पूर्णिमा तिथि के अंतिम मुहूर्त तक)

महत्वपूर्ण पंचांग नोट: सनातन धर्म में उदयातिथि (सूर्योदय के समय जो तिथि मौजूद हो) को ही स्नान-दान के लिए मुख्य माना जाता है। लेकिन जिस पूर्णिमा में रात को चंद्रमा दिखाई देता है, उसे ‘चंद्रव्यापिनी पूर्णिमा’ कहा जाता है, जो व्रत और लक्ष्मी पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसलिए जून 2026 में व्रत और स्नान-दान की तिथियों का निर्धारण पंचांग भेद के अनुसार बेहद सटीकता से किया गया है।

ख) स्नान-दान, कथा और चंद्रोदय के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त स्नान समय: सुबह 04:06 AM से 04:52 AM तक
  • श्री सत्यनारायण पूजा मुहूर्त: सुबह 08:45 AM से दोपहर 12:15 PM तक
  • पूर्णिमा चंद्रोदय समय (Moonrise Time): शाम को जैसे ही क्षितिज पर चंद्रमा का उदय होगा (लगभग 06:55 PM पर), वह समय अर्घ्य देने के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
  • महालक्ष्मी मध्यरात्रि पूजा मुहूर्त: रात 11:55 PM से 12:45 AM तक (निशिता काल)

(नोट: आपके स्थानीय शहर के सूर्योदय और चंद्रोदय के समय के अनुसार इन मुहूर्तों में कुछ मिनटों का अंतर आ सकता है। अपने स्थानीय शहर का सटीक समय जानने के लिए आप हमारे ब्लॉग के दैनिक पंचांग को देख सकते हैं।)

Pournami June 2026 Date and Time

5. ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत

Pournami June 2026 Date and Time: जून के महीने में आने वाली ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व अन्य महीनों की पूर्णिमा से कहीं अधिक है, क्योंकि इस दिन कई बड़े धार्मिक त्योहार मनाए जाते हैं:

१. वट सावित्री पूर्णिमा व्रत (Vat Savitri Purnima)

Pournami June 2026 Date and Time: उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के पंचांगों के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट सावित्री पूर्णिमा व्रत मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी दांपत्य जीवन के लिए पीपल और वट (बरगद) के वृक्ष की पूजा करती हैं। बरगद के पेड़ में साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करके उस पर सूत का धागा लपेटती हैं और माता सावित्री व सत्यवान की कथा सुनती हैं।

२. ज्येष्ठ स्नान और कबीर जयंती

Pournami June 2026 Date and Time: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही महान संत और समाज सुधारक संत कबीर दास जी की जयंती भी मनाई जाती है। इसके अलावा, इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा) में स्नान करने से व्यक्ति के पिछले कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

३. भगवान जगन्नाथ का स्नान यात्रा उत्सव

Pournami June 2026 Date and Time: ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ‘स्नान यात्रा’ (Snana Yatra) उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को दिव्य सुगंधित जल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान बीमार पड़ जाते हैं और उन्हें 15 दिनों के लिए ‘अनासर’ (Avasara) में रखा जाता है। इस दृष्टि से भी यह पूर्णिमा आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🛠️ 6. स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: पूर्णिमा व्रत, पूजा और सत्यनारायण कथा विधि

Pournami June 2026 Date and Time: यदि आप जून 2026 की पूर्णिमा का पूरा धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ उठाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई चरणबद्ध प्रक्रिया के अनुसार पूजा और व्रत का अनुष्ठान करें:

1.प्रातः काल स्नान और व्रत का संकल्प:स्टेप 1.

Pournami June 2026 Date and Time: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हैं, तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। स्वच्छ सफेद या पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने घर के मंदिर के सामने बैठकर हाथ में जल और अक्षत लेकर पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।

2.श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा और कथा:स्टेप 2.

Pournami June 2026 Date and Time: एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। कलश स्थापना करें। भगवान को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करें या सुनें और अंत में कपूर से आरती करें।

3.सुहागिन महिलाओं द्वारा वट वृक्ष की पूजा:स्टेप 3.

Pournami June 2026 Date and Time: विवाहित महिलाएं इस दिन वट (बरगद) के पेड़ के पास जाकर उसे जल अर्पित करें। वृक्ष को रोली, चंदन, भीगे हुए चने और फल चढ़ाएं। इसके बाद कच्चे सूत के धागे को बरगद के पेड़ के चारों ओर लपेटते हुए 7 या 108 बार परिक्रमा करें और अपने पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।

4.शाम को चंद्रमा को अर्घ्य और लक्ष्मी पूजन:स्टेप 4.

Pournami June 2026 Date and Time: शाम को चंद्रोदय के समय एक तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर उगते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके बाद रात के समय माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

🕉️ 7. जून पूर्णिमा पर धन प्राप्ति और सुख-समृद्धि के महा-उपाय (Remedies)

Pournami June 2026 Date and Time: पूर्णिमा की रात को शास्त्रों में ‘महालक्ष्मी की सिद्ध रात्रि’ माना गया है। यदि आपके जीवन में लंबे समय से आर्थिक तंगी चल रही है, कर्ज का बोझ बढ़ गया है या व्यापार में लगातार नुकसान हो रहा है, तो जून 2026 की पूर्णिमा की रात को नीचे दिए गए अचूक उपाय अवश्य करें:

१. कौड़ियों और गोमती चक्र का महा-उपाय (Lakshmi Kauri Upay)

Pournami June 2026 Date and Time: पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी की पूजा करते समय उनके चरणों में 11 पीली कौड़ियां और 11 गोमती चक्र रखें। उनका तिलक करें और रात भर उन्हें वहीं रहने दें। अगले दिन सुबह स्नान के बाद उन कौड़ियों और गोमती चक्रों को एक लाल या पीले रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें। इससे घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती और रुका हुआ पैसा तुरंत वापस मिल जाता है।

२. पीपल के वृक्ष पर मीठा जल चढ़ाना

पूर्णिमा के दिन सुबह के समय पीपल के पेड़ में साक्षात माता लक्ष्मी का आगमन होता है। इस दिन एक लोटे में जल लेकर उसमें थोड़ा सा कच्चा दूध और चीनी या गुड़ मिला लें। इस मीठे जल को पीपल की जड़ में अर्पित करें और अपनी मनोकामना कहें। इससे कुंडली के पितृ दोष और आर्थिक बाधाएं हमेशा के लिए दूर हो जाती हैं।

३. खीर का भोग और चंद्र देव को अर्घ्य

पूर्णिमा की रात को गाय के दूध से सात्विक चावल की खीर बनाएं। इस खीर को रात के समय कुछ घंटों के लिए चंद्रमा की रोशनी (Chandrama ki Roshni) के नीचे रख दें, ताकि चंद्रमा की अमृत किरणें उसमें समाहित हो सकें। इसके बाद उस खीर का भोग भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को लगाएं और पूरे परिवार में प्रसाद के रूप में वितरित करें। इससे परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और मानसिक तनाव दूर होता है।

🚫 8. पूर्णिमा के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां (वर्जित कार्य)

चूंकि पूर्णिमा के दिन चंद्रमा और ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं अपने उच्चतम स्तर पर होती हैं, इसलिए इस दिन कुछ कार्यों को करने से हमारे शास्त्रों में सख्त मनाही की गई है:

  • तामसिक भोजन का सेवन: पूर्णिमा के पवित्र दिन पर मांस, मदिरा, अंडा, मछली, लहसुन और प्याज का सेवन भूलकर भी न करें। इस दिन पूरी तरह से सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए, अन्यथा मानसिक भटकाव बढ़ता है और माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं।
  • घर में वाद-विवाद और क्रोध: इस दिन अपने घर के सदस्यों, माता-पिता या जीवनसाथी पर क्रोध न करें और न ही किसी से झगड़ा करें। जिस घर में पूर्णिमा के दिन क्लेश होता है, वहाँ दरिद्रता का वास हो जाता है।
  • किसी असहाय का अपमान: इस दिन आपके घर के दरवाजे पर यदि कोई गरीब, भिखारी या जरूरतमंद आए, तो उसे खाली हाथ न लौटाएं। अपनी क्षमता के अनुसार उसे अन्न या धन का दान अवश्य दें। किसी बुजुर्ग या साधु का अपमान करने से भारी दोष लगता है।
  • देर तक सोना: पूर्णिमा के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। इस दिन दिन के समय सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में तामसिक ऊर्जा बढ़ती है और पुण्य फलों का नाश होता है।
  • उधार का लेन-देन: पूर्णिमा तिथि पर न तो किसी को पैसा उधार देना चाहिए और न ही किसी से कर्ज लेना चाहिए। इस दिन किया गया आर्थिक लेन-देन आपके ऊपर कर्ज का बोझ और बढ़ा सकता है।

9. Frequently Asked Questions (FAQs) – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या जून 2026 की पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा घर पर आयोजित करना शुभ है?

उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल! पूर्णिमा तिथि भगवान विष्णु के स्वरूप श्री सत्यनारायण जी की पूजा के लिए ही परम सिद्ध मानी गई है। जून की इस ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन घर पर कथा कराने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, सुख-समृद्धि आती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।

प्रश्न 2: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत और वट सावित्री अमावस्या व्रत में क्या अंतर है?

उत्तर: मूल रूप से दोनों व्रतों का उद्देश्य और पूजा विधि एक ही है— सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा करना। अंतर केवल पंचांग का है। उत्तर भारत (जैसे यूपी, बिहार, एमपी) में अमावस्या को यह व्रत रखा जाता है, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में पूर्णिमा के दिन यह व्रत रखने की परंपरा है।

प्रश्न 3: कुंडली में चंद्र दोष को दूर करने के लिए पूर्णिमा के दिन क्या दान करना चाहिए?

उत्तर: जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर या पीड़ित है, उन्हें पूर्णिमा के दिन सफेद रंग की वस्तुओं का दान करना चाहिए। जैसे— चावल, चीनी, दूध, दही, सफेद वस्त्र, या चांदी का दान करने से चंद्र देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

प्रश्न 4: पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देना क्यों जरूरी है?

उत्तर: पूर्णिमा की रात को चंद्रमा अपनी पूर्ण ऊर्जा के साथ आकाश में मौजूद रहता है। इस दिन चंद्र देव को जल और दूध का अर्घ्य देने से हमारे शरीर के भीतर का जल तत्व संतुलित होता है, आंखों की रोशनी बढ़ती है और जीवन में सुख-सौभाग्य का उदय होता है।

🎯 10. निष्कर्ष: जीवन में समृद्धि और आंतरिक शांति लाने वाली पावन तिथि

संक्षेप में कहें तो, Pournami June 2026 Date and Time की यह प्रामाणिक और विस्तृत जानकारी आपके जीवन में सुख, समृद्धि और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। पूर्णिमा की यह रात केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह माता महालक्ष्मी की असीम कृपा पाने, अपने वैवाहिक जीवन को अखंड सौभाग्य से सींचने और सत्यनारायण भगवान की भक्ति में लीन होने का एक दिव्य और सर्वोत्तम अवसर है।

इस लेख में बताए गए सटीक पंचांग मुहूर्त, शास्त्रोक्त पूजा विधियों और लक्ष्मी प्राप्ति के अचूक उपायों का श्रद्धापूर्वक पालन करके आप भी अपने जीवन के आर्थिक कष्टों, मानसिक क्लेशों और बाधाओं से हमेशा के लिए मुक्ति पा सकते हैं।

📢 कमेंट बॉक्स में अपनी राय और अनुभव साझा करें!

क्या आप भी हर महीने आने वाली पूर्णिमा या पौर्णमी का व्रत रखते हैं? क्या आपके घर में भी पूर्णिमा के दिन श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ किया जाता है? इस जून की वट सावित्री पूर्णिमा पूजा या शुभ मुहूर्त को लेकर आपके मन में कोई भी शंका, सवाल या जिज्ञासा है?

बिना संकोच के अपने विचार और प्रश्न नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स (Comment Box) में हमसे साझा करें! हमारे अनुभवी पंचांग और ज्योतिष एक्सपर्ट्स आपके हर सवाल का तुरंत और सटीक धार्मिक समाधान देंगे। अगर आपको हमारा यह गहन रिसर्च और वैदिक पंचांग पर आधारित लेख उपयोगी और ज्ञानवर्धक लगा हो, तो इसे अपने परिवार के सदस्यों, सुहागिन महिलाओं, मित्रों और अपने सभी आध्यात्मिक व्हाट्सएप ग्रुप्स (WhatsApp Groups) पर Share करना बिल्कुल न भूलें। आपके एक शेयर से किसी अन्य भक्त को भी सही मुहूर्त और पूजा विधि की सटीक जानकारी मिल सकती है! जय लक्ष्मी नारायण! जय चंद्र देव!

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