निर्जला एकादशी कब से शुरू है? जानिए वर्ष 2026 की सटीक तारीख, पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त, कड़े नियम और पारण का सही समय
1. प्रस्तावना: सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का महत्व
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: हिंदू पंचांग और सनातन धर्म की परंपराओं में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वोच्च और मोक्ष प्रदाता माना गया है। पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशियां आती हैं, लेकिन इन सबमें ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का स्थान सबसे विशिष्ट और कठिन है। इसे निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) या भीमसेनी एकादशी (Bhimseni Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। इस व्रत की कठोरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें अन्न के साथ-साथ जल (पानी) की एक बूंद भी ग्रहण करने की मनाही होती है।
जैसे ही ज्येष्ठ का महीना शुरू होता है, देश भर के श्रद्धालु, व्रत रखने वाले भक्त और इंटरनेट पर लोग एक ही मुख्य सवाल खोजने लगते हैं कि “Nirjala Ekadashi kab se shuru hai?“गया है। इस महा-लेख में हम आपकी इसी शंका का पूर्ण निवारण करेंगे और पंचांग के अनुसार सटीक समय की विस्तृत जानकारी देंगे।
2. निर्जला एकादशी कब से शुरू है? पंचांग की सटीक गणना (Exact Start & End Time)
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: शास्त्रों और वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी के आधार पर व्रत की अवधि तय होती है।
वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 जून 2026 (बुधवार) को शाम 06 बजकर 12 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं, इस एकादशी तिथि की समाप्ति 25 जून 2026 (गुरुवार) को रात 08 बजकर 09 मिनट पर होगी।
[ एकादशी तिथि चक्र - वर्ष 2026 ]
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तिथि का आरंभ (Start Time) तिथि की समाप्ति (End Time)
24 जून 2026 | शाम 06:12 बजे 25 जून 2026 | रात 08:09 बजे
📅 24 जून या 25 जून: व्रत किस दिन रखें?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: शास्त्रों का अकाट्य नियम है कि जिस तिथि में सूर्योदय होता है, यानी उदयातिथि (Udayatithi), उसी दिन का व्रत सामान्य भक्तों और गृहस्थों के लिए सर्वोपरि माना जाता है।
- 24 जून को: सूर्योदय के समय दशमी तिथि होगी, एकादशी शाम को शुरू हो रही है।
- 25 जून को: सूर्योदय एकादशी तिथि के प्रभाव में होगा और यह तिथि रात 08:09 बजे तक रहेगी।
इसलिए, उदयातिथि के अचूक सिद्धांत के अनुसार, निर्जला एकादशी का पावन व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को ही रखा जाएगा। सभी वैष्णव और स्मार्त संप्रदाय के लोग इसी दिन पूरे नियम के साथ निर्जल उपवास रखेंगे।
3. Nirjala Ekadashi 2026 Shubh Muhurat (पूजा और पारण के शुभ मुहूर्त की तालिका)
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: यदि आप इस महाव्रत का पूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपको राहुकाल, भद्रा और शुभ चौघड़िया मुहूर्तों का ध्यान रखना चाहिए। नीचे दी गई तालिका से आप पूरे दिन के शुभ समय को नोट कर सकते हैं:
📋 समय और मुहूर्त संदर्भ तालिका (Complete Muhurat Matrix)
| इवेंट / शुभ कार्य | दिनांक (Date) | सटीक समय (Accurate Timing) |
| एकादशी तिथि का प्रारंभ | 24 जून 2026 (बुधवार) | शाम 06:12 बजे से |
| एकादशी तिथि का समापन | 25 जून 2026 (गुरुवार) | रात 08:09 बजे तक |
| सूर्योदय का समय (व्रत का आरंभ) | 25 जून 2026 (गुरुवार) | सुबह 05:25 AM |
| ब्रह्म मुहूर्त (स्नान और ध्यान) | 25 जून 2026 (गुरुवार) | सुबह 04:04 AM से 04:45 AM तक |
| अमृत काल (अति शुभ मुहूर्त) | 25 जून 2026 (गुरुवार) | सुबह 06:46 AM से 08:32 AM तक |
| अभिजीत मुहूर्त (मुख्य विष्णु पूजा) | 25 जून 2026 (गुरुवार) | दोपहर 11:56 AM से 12:52 PM तक |
| व्रत पारण का समय (Breaking the Fast) | 26 जून 2026 (शुक्रवार) | सुबह 05:25 AM से 08:13 AM के बीच |
| द्वादशी तिथि की समाप्ति | 26 जून 2026 (शुक्रवार) | रात 10:22 बजे तक |
4. निर्जला एकादशी की व्रत कथा: भीम के संकल्प की कहानी
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: इस एकादशी को ‘भीमसेनी एकादशी’ या ‘पांडव एकादशी’ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे महाभारत काल की एक बहुत ही सुंदर पौराणिक कथा है।
महाभारत काल में पांचों पांडव भाई (युधिष्ठिर, अर्जुन, भीम, नकुल, सहदेव) और माता कुंती के साथ द्रौपदी भी हर महीने आने वाली दोनों एकादशियों का व्रत पूरी निष्ठा से रखते थे। लेकिन भीमसेन के साथ एक बड़ी समस्या थी। उनके पेट में ‘वृक’ नाम की एक विशेष अग्नि (भूख) थी, जिसके कारण उन्हें अत्यधिक भोजन की आवश्यकता होती थी। वे अपनी भूख को नियंत्रित करने में पूरी तरह असमर्थ थे। उनके लिए एक समय का भोजन छोड़ना भी पहाड़ तोड़ने जैसा था। इस कारण वे कभी एकादशी का व्रत नहीं रख पाते थे और अंदर ही अंदर खुद को पापी महसूस करते थे।
अपनी इस व्यथा को लेकर भीमसेन महर्षि वेदव्यास जी के पास गए। भीम ने कहा—“हे पितामह! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक उपवास रखते हैं और मुझे भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करते हैं। परंतु मैं भगवान जनार्दन की भक्ति तो करना चाहता हूँ, लेकिन अपनी भूख के आगे विवश हूँ। कृपा कर मुझे कोई ऐसा सरल मार्ग बताएं, जिससे मुझे बिना हर महीने व्रत किए भी वही पुण्य और मोक्ष मिल सके, जो मेरे भाइयों को मिलता है।”
व्यास जी ने भीम की परेशानी को समझा और कहा—“हे भीम! तुम चिंता मत करो। शास्त्रों में हर परिस्थिति के लिए विधान है। तुम साल की सभी 24 एकादशियां नहीं कर सकते, तो मत करो। तुम ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की इस एकमात्र एकादशी का व्रत पूरी निष्ठा से रखो। इस व्रत की शर्त यह है कि तुम्हें सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक अन्न ही नहीं, बल्कि जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करनी है। यदि तुम इस एक कठिन व्रत को सफलतापूर्वक पूरा कर लेते हो, तो तुम्हें वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य फल अकेले इसी व्रत से मिल जाएगा।”
व्यास जी की बात सुनकर भीमसेन ने पूरी इच्छाशक्ति बटोरी और ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के दिन बिना पानी पिए कठोर उपवास रखा। दोपहर होते-होते भूख और प्रचंड गर्मी की प्यास के कारण भीमसेन अचेत और मूर्छित होने लगे, लेकिन उन्होंने अपना संकल्प नहीं तोड़ा। अगले दिन द्वादशी को भगवान विष्णु की पूजा के बाद गंगाजल पीकर उन्होंने अपना व्रत पूरा किया। इसी अलौकिक साहस के कारण इस व्रत को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा।

5. प्रामाणिक पूजा विधि: 25 जून 2026 को कैसे करें आराधना? (Step-by-Step Puja Vidhi)
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: यदि आप 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत शुरू कर रहे हैं, तो सुबह से लेकर रात तक की पूजा इस विधि से करें:
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: ब्रह्म मुहूर्त स्नान: 25 जून की सुबह सूर्योदय से पहले उठें। स्नान के पानी में कुछ बूंदें गंगाजल की डालें।
- पीले वस्त्र धारण करें: भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पूजा के लिए साफ पीले या सुनहरे रंग के कपड़े पहनें।
- व्रत का संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पीला फूल लेकर भगवान के सामने संकल्प लें: “हे प्रभु विष्णु, आज मैं आपकी प्रसन्नता के लिए निर्जला एकादशी का व्रत रख रहा/रही हूँ। भगवान मुझे इसे निर्विघ्न पूरा करने की शक्ति दें।”
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: विष्णु-लक्ष्मी स्थापना: घर के मंदिर में एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति रखें। उन्हें पीले चंदन का तिलक लगाएं और पीले फूल व फल अर्पित करें।
- तुलसी दल का अर्पण: भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। विशेष ध्यान रखें: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए व्रत के लिए पत्ते एक दिन पहले यानी 24 जून को ही तोड़कर रख लें।
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: मंत्र और पाठ: दीप जलाकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
- आरती और क्षमा याचना: पूजा के अंत में घी के दीपक से आरती करें और पूजा में अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए भगवान से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।
6. निर्जला एकादशी के कड़े नियम: क्या करें और क्या न करें?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: चूंकि यह व्रत बेहद शक्तिशाली और कठिन है, इसलिए इसके नियमों का पालन बहुत कड़ाई से करना चाहिए:
👍 क्या करना अनिवार्य है? (Do’s)
- जल का दान: इस दिन खुद पानी न पीते हुए दूसरों को पानी पिलाना महापुण्य का काम है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं या ठंडे पानी का वितरण करें।
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: मिट्टी के घड़े का दान: किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को मिट्टी का मटका (जिसमें पानी और चीनी भरी हो) दान करने से कुंडली के कई ग्रह दोष शांत होते हैं।
- रात्रि जागरण: एकादशी की रात को सोना वर्जित माना गया है। पूरी रात भगवान के भजनों का कीर्तन करें या धार्मिक पुस्तकें पढ़ें।
👎 भूलकर भी न करें ये गलतियां (Don’ts)
- पानी पीना: व्रत की अवधि के दौरान भूलकर भी पानी न पिएं (केवल पूजा के समय आचमन के लिए जितने पानी की अनुमति है, उतना ही लें)।
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: चावल का सेवन: एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना महापाप माना गया है। जो लोग व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी इस दिन चावल नहीं खाने चाहिए।
- क्रोध और अपशब्द: इस दिन किसी पर गुस्सा न करें, किसी का दिल न दुखाएं और न ही किसी की बुराई (चुगली) करें। अपने मन को पूरी तरह शांत और सात्विक रखें।
7. व्रत पारण विधि 2026: व्रत खोलने का सही समय और तरीका
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: किसी भी एकादशी व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब उसका पारण (व्रत खोलना) बिल्कुल सही समय पर और सही विधि से किया जाए।
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: पारण की तिथि: 26 जून 2026 (शुक्रवार)
- पारण का शुभ समय: सुबह 05:25 AM से 08:13 AM के बीच
- Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: पारण की विधि: 26 जून की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, भगवान विष्णु की पूजा करें, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अनाज और दक्षिणा दान करें। इसके बाद सबसे पहले भगवान का चरणामृत या तुलसी दल मिश्रित जल पीकर अपना व्रत खोलें। व्रत खोलने के तुरंत बाद भारी या तला-भुना भोजन न करें, बल्कि हल्का सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓ प्रश्न 1: वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी कब से शुरू हो रही है?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: उत्तर: पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से हो रही है, लेकिन उदयातिथि के नियम के कारण व्रत 25 जून 2026 (गुरुवार) को रखा जाएगा।
❓ प्रश्न 2: क्या अस्वस्थ व्यक्ति या गर्भवती महिलाएं भी यह निर्जल व्रत रख सकती हैं?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: उत्तर: शास्त्रों में अस्वस्थ, वृद्ध, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए नियमों में ढील दी गई है। यदि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो आप निर्जल रहने के बजाय पानी पीकर, जूस लेकर या फलाहार (फल और दूध) खाकर भी यह व्रत रख सकते हैं। भगवान आपके भाव देखते हैं, शरीर को कष्ट देना जरूरी नहीं है।
❓ प्रश्न 3: निर्जला एकादशी के दिन कौन सी वस्तुओं का दान करना सबसे शुभ होता है?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: उत्तर: इस दिन जल से भरा मिट्टी का घड़ा (मटका), खरबूजा, आम, पंखा, छाता, चप्पल, और पीले रंग के वस्त्र दान करना अत्यंत कल्याणकारी और अक्षय पुण्य देने वाला माना जाता है।
❓ प्रश्न 4: एकादशी के दिन चावल खाना क्यों वर्जित है?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महर्षि मेधा के शरीर का अंश पृथ्वी में समा गया था, जिससे जौ और चावल उत्पन्न हुए। इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस के सेवन के समान माना गया है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी चावल में पानी की मात्रा अधिक होती है, जिससे इस दिन मन विचलित हो सकता है, इसलिए इसे खाने से परहेज किया जाता है।
❓ प्रश्न 5: क्या निर्जला एकादशी के दिन ब्रश या दातुन कर सकते हैं?
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: उत्तर: एकादशी के दिन किसी पेड़ की टहनी (दातुन) तोड़ना वर्जित होता है। आप केवल साफ पानी से कुल्ला करके मुंह साफ कर सकते हैं। ध्यान रखें कि कुल्ला करते समय पानी का एक भी अंश पेट के अंदर न जाए।
🎯 निष्कर्ष और कॉल टू एक्शन (Conclusion & Call to Action)
Nirjala Ekadashi Kab Se Shuru Hai 2026: निर्जला एकादशी का महाव्रत हमारी आध्यात्मिक चेतना, आत्म-संयम और शारीरिक शुद्धि का एक अद्भुत संगम है। यदि आप वर्ष 2026 में 25 जून के दिन पूरी श्रद्धा, भक्ति और ऊपर बताए गए पंचांग के सही मुहूर्त के अनुसार इस व्रत को शुरू करते हैं, तो निश्चित ही भगवान लक्ष्मी नारायण की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे और सुख-समृद्धि का वास होगा।
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