Billionaire Real Estate Financing Secrets: अरबपति अपनी प्रॉपर्टीज को कैसे फाइनेंस करते हैं? लग्जरी रियल एस्टेट साम्राज्य और गुप्त वित्तीय रणनीतियों का संपूर्ण विश्लेषण
अध्याय १: प्रस्तावना – धन का भ्रम और अरबपतियों की रियल एस्टेट की सच्चाई (Introduction)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: जब भी हम किसी वैश्विक अरबपति, टेक मोगुल (Tech Mogul), या किसी बड़े बिजनेस टायकून के नए महल जैसे घर (Mega-Mansion) या गगनचुंबी कमर्शियल टावर खरीदने की खबर सुनते हैं, तो हमारे मन में पहला विचार यही आता है कि उन्होंने अपनी जेब से करोड़ों या अरबों रुपये कैश (Cash) दिए होंगे और डील क्लोज कर दी होगी। उदाहरण के लिए, जब न्यूयॉर्क के पेंटहाउस या लंदन के मेफेयर में कोई ₹500 करोड़ की हवेली बिकती है, तो आम जनता को लगता है कि यह शुद्ध नकदी का खेल है। लेकिन वित्तीय दुनिया (Financial World) की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग और बेहद हैरान करने वाली है।
अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (UHNWIs – जिनकी कुल संपत्ति $30 मिलियन या उससे अधिक है) और अरबपति कभी भी अपनी रियल एस्टेट डील्स के लिए अपने लिक्विड कैश (Liquid Cash) का इस्तेमाल नहीं करते। वे जिस जादुई वित्तीय हथियार का उपयोग करते हैं, उसे कॉर्पोरेट जगत में “Billionaire Real Estate Financing” कहा जाता है।
यह तकनीक केवल एक साधारण होम लोन नहीं है जो बैंकों से एक आम आदमी लेता है; यह जटिल वित्तीय इंजीनियरिंग, प्राइवेट बैंकिंग (Private Banking), एसेट-बैक्ड लेंडिंग और टैक्स हेवन (Tax Havens) का एक मिलाजुला नेटवर्क है। इस महा-लेख में हम अरबपतियों की इस गुप्त क्रेडिट और डेट (Debt) स्ट्रेटेजी के एक-एक पन्ने को खोलेंगे और समझेंगे कि अमीर लोग कर्ज का इस्तेमाल अमीर बनने और टैक्स बचाने के लिए कैसे करते हैं।
📊 अध्याय २: तुलनात्मक डेटा शीट – आम आदमी का होम लोन बनाम अरबपतियों की रियल एस्टेट फाइनेंसिंग
Billionaire Real Estate Financing Secrets: लग्जरी रियल एस्टेट फाइनेंसिंग की गहराई को समझने के लिए, नीचे दी गई तालिका में सामान्य रिटेल होम लोन और यूएचएनडब्ल्यूआई (UHNWI) फाइनेंसिंग के बीच के बुनियादी और संरचनात्मक अंतर को स्पष्ट किया गया है:
| वित्तीय पैरामीटर्स (Parameters) | सामान्य रिटेल होम लोन (Retail Home Loan) | अरबपतियों की रियल एस्टेट फाइनेंसिंग (Billionaire Financing) |
| लोन का मुख्य आधार (Underwriting Base) | आवेदक की मासिक सैलरी या सालाना आईटीआर (ITR) | कुल वैश्विक संपत्ति, शेयर पोर्टफोलियो और एसेट्स |
| डाउन पेमेंट की आवश्यकता | प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 15% से 20% कैश | प्रायः 0% (शून्य डाउन पेमेंट डील्स) |
| लोन का प्रकार (Loan Type) | अमोर्टाइज्ड लोन (Amortized – मूलधन + ब्याज दोनों) | इंटरेस्ट-ओनली (Interest-Only) या बुलेट रिपेमेंट |
| ब्याज दरें (Interest Rates) | रिटेल प्राइम लेंडिंग रेट्स (काफी अधिक) | SOFR / बेंचमार्क रेट्स पर कस्टमाइज्ड (अत्यंत कम) |
| गारंटी/कोलैटरल (Collateral) | केवल वही खरीदी जा रही प्रॉपर्टी बंधक होती है | कंपनी के शेयर्स, बांड्स, गोल्ड या लिक्विड फंड्स |
| मुख्य उद्देश्य (Primary Goal) | रहने के लिए घर खरीदना और कर्ज मुक्त होना | लीवरेज (Leverage) बढ़ाना, टैक्स बचाना और वेल्थ बढ़ाना |
⚙️ अध्याय ३: ‘कैश इज ट्रैश’ – अरबपति प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अपनी नकदी का उपयोग क्यों नहीं करते?
Billionaire Real Estate Financing Secrets: एक आम आदमी का सपना होता है कि वह जल्द से जल्द अपने घर का लोन चुकाकर ‘कर्ज मुक्त’ हो जाए। लेकिन वित्तीय रूप से साक्षर अरबपति कर्ज को एक दुश्मन नहीं, बल्कि अपना सबसे वफादार दोस्त मानते हैं। वे अपनी जेब से कैश क्यों नहीं देते, इसके पीछे तीन कड़े आर्थिक सिद्धांत काम करते हैं:
१. अवसर लागत का सिद्धांत (Opportunity Cost)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: मान लीजिए एक अरबपति को ₹100 करोड़ का एक अल्ट्रा-लग्जरी विला खरीदना है। अगर वह अपनी जेब से ₹100 करोड़ कैश निकालकर बिल्डर को दे देता है, तो उसकी वह ₹100 करोड़ की लिक्विडिटी हमेशा के लिए उस घर की दीवारों और ईंटों में लॉक हो जाएगी।
- वही अरबपति उस ₹100 करोड़ को अपने बिजनेस में लगाकर या शेयर बाजार में री-इन्वेस्ट करके 15% से 20% का वार्षिक रिटर्न कमा सकता है।
- यदि उसे बैंक से मात्र 4% या 5% की ब्याज दर पर ₹100 करोड़ का लोन मिल जाता है, तो वह बैंक को 5% ब्याज देगा और अपनी नकदी से 15% कमाएगा। इस प्रकार, बैंक के पैसे से वह बैठे-बिठाए 10% का शुद्ध मुनाफा (Arbitrage) कमा लेता है। इसे ‘पैसा बनाने के लिए दूसरे के पैसे का उपयोग करना’ (OPM – Other People’s Money) कहते हैं।
२. लिक्विडिटी क्रंच से बचाव (Maintaining Liquidity)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: अमीर लोगों की अधिकांश संपत्ति भौतिक कैश के रूप में नहीं, बल्कि कंपनियों के शेयर्स (Stocks), रियल एस्टेट और ट्रस्ट्स में बंधी होती है। यदि एलोन मस्क या जेफ बेजोस को कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदनी हो, तो कैश जुटाने के लिए उन्हें अपनी कंपनी के लाखों शेयर्स बेचने पड़ेंगे।
- अगर वे शेयर्स बेचते हैं, तो कंपनी में उनकी हिस्सेदारी (Ownership Control) कम हो जाएगी, जो वे कभी नहीं चाहते।
- शेयर्स बेचने से बाजार में पैनिक फैल सकता है और उनकी कंपनी के स्टॉक की कीमतें गिर सकती हैं।
३. कैपिटल गेंस टैक्स का घातक जाल (Tax Avoidance Strategy)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: यह सबसे बड़ा वित्तीय कारण है। यदि कोई अरबपति ₹100 करोड़ के शेयर्स कैश जुटाने के लिए बेचता है, तो उसे उस पर भारी कैपिटल गेंस टैक्स (Capital Gains Tax) चुकाना होगा, जो कई देशों में 20% से 40% तक हो सकता है।
- Billionaire Real Estate Financing Secrets: यानी ₹100 करोड़ जुटाने के लिए उन्हें लगभग ₹130 करोड़ के शेयर्स बेचने होंगे और ₹30 करोड़ सरकार को टैक्स देना होगा।
- इसके विपरीत, यदि वे उन शेयर्स को बैंक के पास गिरवी रखकर लोन (Loan) ले लेते हैं, तो लोन की राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता क्योंकि कर्ज को आय (Income) नहीं माना जाता। इस प्रकार वे बिना ₹1 का टैक्स दिए ₹100 करोड़ की नकदी तुरंत हासिल कर लेते हैं।

अध्याय ४: अरबपतियों के वित्तीय हथियार – ४ सबसे गुप्त लोन स्ट्रक्चर्स
Billionaire Real Estate Financing Secrets: अल्ट्रा-लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट सामान्य बैंकिंग नियमों पर नहीं चलता। यहाँ विशेष ‘प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट’ (Private Wealth Management) टीमें काम करती हैं, जो अरबपतियों की जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइज्ड लोन प्रोडक्ट्स डिजाइन करती हैं। आइए इन गुप्त लोन स्ट्रक्चर्स को विस्तार से समझते हैं:
१. SBLOC – सिक्योरिटीज-बैक्ड लाइन्स ऑफ क्रेडिट (Securities-Backed Lines of Credit)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: यह अरबपतियों का सबसे पसंदीदा वित्तीय हथियार है। इसमें रियल एस्टेट खरीदने के लिए खुद उस रियल एस्टेट को गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती।
- प्रक्रिया: अरबपति अपने अरबों रुपये के स्टॉक और बांड पोर्टफोलियो को प्राइवेट बैंक (जैसे JP Morgan, UBS, या Goldman Sachs) के पास डिजिटल रूप से लॉक कर देते हैं।
- Billionaire Real Estate Financing Secrets:
- लाभ: इसकी ब्याज दरें दुनिया में सबसे कम होती हैं क्योंकि बैंक के पास लिक्विड शेयर्स की गारंटी होती है। इस पैसे का उपयोग करके अरबपति कुछ ही घंटों में पूरी की पूरी प्रॉपर्टी ‘कैश डील’ के रूप में खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें मार्केट में भारी डिस्काउंट भी मिलता है।
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| SBLOC लोन की कार्यप्रणाली (Securities-Backed) |
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| अरबपति के शेयर्स/बांड्स =======> प्राइवेट बैंक के पास गिरवी (Collateral) |
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| बैंक द्वारा तुरंत जारी: ==============> मल्टी-मिलियन डॉलर क्रेडिट लाइन |
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| परिणाम: 0% टैक्स के साथ बिना शेयर्स बेचे लग्जरी विला की 'कैश डील' क्लोज। |
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२. इंटरेस्ट-ओनली मोर्टगेज (Interest-Only Mortgages)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: एक सामान्य व्यक्ति जब होम लोन लेता है, तो उसकी ईएमआई (EMI) में मूलधन (Principal) और ब्याज (Interest) दोनों शामिल होते हैं, जिससे हर महीने एक बड़ी राशि खाते से कटती है। लेकिन अरबपति Interest-Only Loans लेते हैं।
- Billionaire Real Estate Financing Secrets: रणनीति: इस लोन के तहत अरबपति को 5, 7 या 10 वर्षों तक बैंक को हर महीने केवल और केवल ब्याज की न्यूनतम राशि चुकानी होती है। मूलधन का ₹1 भी वापस नहीं किया जाता।
- बुलेट रिपेमेंट: लोन की अवधि समाप्त होने पर, वे या तो उस प्रॉपर्टी को ऊंचे दामों पर बेचकर पूरा मूलधन एक बार में चुका देते हैं (Bullet Repayment), या फिर उस लोन को किसी दूसरे बैंक के साथ नए इंटरेस्ट-ओनली लोन में ‘रिफाइनेंस’ (Refinance) करा लेते हैं। इस तरह वे जीवन भर बिना मूलधन चुकाए आलीशान महलों में रहते हैं।
३. क्रॉस-कोलैटरलाइजेशन (Cross-Collateralization)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: जब किसी सौदे का आकार इतना बड़ा होता है कि कोई एक संपत्ति उसकी गारंटी के लिए पर्याप्त नहीं होती, तब इस तकनीक का उपयोग किया जाता है।
- Billionaire Real Estate Financing Secrets: इसमें बैंक किसी एक प्रॉपर्टी को बंधक नहीं बनाता, बल्कि अरबपति के वैश्विक साम्राज्य में फैली विभिन्न संपत्तियों—जैसे उनका प्राइवेट जेट, उनकी सुपरयाट (Superyacht), उनकी पुरानी कमर्शियल बिल्डिंग्स और आर्ट कलेक्शंस (Art Collections)—को एक साथ एक ही लोन के कोलैटरल पूल (Collateral Pool) में बांध देता है।
- इससे बैंक का रिस्क बिल्कुल जीरो हो जाता है और अरबपति को बिना किसी डाउन पेमेंट के 100% लोन-टू-वैल्यू (LTV) पर लोन मिल जाता है।
४. सिंडिकेटेड कमर्शियल डेट (Syndicated Commercial Debt)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: जब बात किसी $500 मिलियन या $1 बिलियन के गगनचुंबी कमर्शियल टावर (जैसे न्यूयॉर्क का एम्पायर स्टेट या दुबई का कोई मेगा प्रोजेक्ट) को खरीदने या री-फाइनेंस करने की आती है, तो कोई एक बैंक अकेले इतना बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहता।
- Billionaire Real Estate Financing Secrets: बैंकों का समूह: ऐसे मामलों में, कई सारे इंटरनेशनल बैंक मिलकर एक ‘सिंडिकेट’ (Syndication Group) बनाते हैं। लीड बैंक पूरी डील को स्ट्रक्चर करता है और बाकी बैंक लोन की राशि में अपना-अपना हिस्सा (जैसे कोई 10%, कोई 20%) बांट लेते हैं। इससे अरबपति को बहुत बड़ा फंड एक ही जगह मिल जाता है और बैंकिंग सिस्टम भी सुरक्षित रहता है।
🏢 अध्याय ५: ऑफशोर शेल कंपनियां और ‘ट्रस्ट’ का मकड़जाल – गोपनीयता और टैक्स चोरी से बचाव
Billionaire Real Estate Financing का एक और बेहद महत्वपूर्ण और रहस्यमयी पहलू है—गोपनीयता (Privacy) और संपत्ति का संरक्षण (Asset Protection)। दुनिया का कोई भी असली अरबपति कभी भी अपने वास्तविक नाम से किसी लैंड रजिस्ट्री (Land Registry) में प्रॉपर्टी नहीं खरीदता।
शेल कंपनियों का उपयोग (Shell Companies)
Billionaire Real Estate Financing Secrets: वहाँ लिखा होगा—“Blue Sky Holdings LLC” या “Alpha Premium Investments Ltd.”
- ये कंपनियाँ अक्सर केमैन आइलैंड्स (Cayman Islands), ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI), या पनामा जैसे टैक्स हेवन देशों में पंजीकृत होती हैं, जहाँ के सख्त कानूनों के कारण यह पता लगाना असंभव होता है कि उस कंपनी का असली मालिक (Beneficial Owner) कौन है।
लोन फ्लो का ढांचा:
- Billionaire Real Estate Financing Secrets: प्राइवेट बैंक लोन की राशि अरबपति को व्यक्तिगत रूप से नहीं देता, बल्कि उनकी इस विदेशी शेल कंपनी (Shell Company) को ट्रांसफर करता है।
- शेल कंपनी उस पैसे से प्रॉपर्टी खरीदती है।
- फायदा: यदि भविष्य में उस अरबपति पर कोई कानूनी मुकदमा होता है या उनका बिजनेस दिवालिया (Bankruptcy) हो जाता है, तो कोई भी कोर्ट या लेनदार उस लग्जरी घर को जब्त नहीं कर सकता, क्योंकि कानूनी तौर पर उस घर की मालिक वह शेल कंपनी है, न कि वह अरबपति व्यक्तिगत रूप से।
🌍 अध्याय ६: कमर्शियल रियल एस्टेट फाइनेंसिंग और ‘सीएमबीएस’ (CMBS) का खेल
Billionaire Real Estate Financing Secrets: कमर्शियल रियल एस्टेट (CRE) जैसे शॉपिंग मॉल्स, टेक पार्क्स और ऑफिस हेक्सागोन्स को फाइनेंस करने का तरीका आवासीय संपत्तियों से काफी भिन्न होता है। यहाँ अरबपति CMBS (Commercial Mortgage-Backed Securities) के चक्रव्यूह का उपयोग करते हैं।
- सीएमबीएस क्या है? जब कोई अरबपति किसी बहुत बड़ी कमर्शियल प्रॉपर्टी पर बैंकों से लोन लेता है, तो बैंक उन बड़े-बड़े कमर्शियल लोन्स को एक साथ इकट्ठा (Pool) करते हैं।
- फिर उस पूल को वित्तीय बांड्स (Securities) के रूप में बदल दिया जाता है और वॉल स्ट्रीट या शेयर बाजार में बड़े संस्थागत निवेशकों (जैसे इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड्स) को बेच दिया जाता है।
- Billionaire Real Estate Financing Secrets: फायदा: इस प्रक्रिया से बैंकों के पास तुरंत वापस नया कैश आ जाता है, जिसका उपयोग वे उस अरबपति को उसकी अगली बड़ी प्रॉपर्टी फाइनेंस करने के लिए दे देते हैं। यह चक्र लगातार चलता रहता है और अरबपति एक के बाद एक पूरा कमर्शियल एम्पायर खड़ा कर लेता है।
अध्याय ७: अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न (Deep-Dive Exhaustive FAQs)
Q2: क्या भारत में भी बड़े बिजनेसमैन (जैसे अंबानी या अडानी) इसी तरह की रियल एस्टेट फाइनेंसिंग का उपयोग करते हैं?
Billionaire Real Estate Financing Secrets: Ans: जी हाँ, बिल्कुल। भारत के शीर्ष कॉर्पोरेट घराने और यूएचएनडब्ल्यूआई (UHNWI) भी अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक संपत्तियों के लिए इसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मॉडल का पालन करते हैं। भारत में बड़े प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट बैंक (जैसे कोटैक प्राइवेट, एComprehensive प्राइवेट बैंकिंग विंग्स ऑफ आईसीआईसीआई और विदेशी बैंक जैसे बार्कलेज व एचएसबीसी) भारतीय अरबपतियों के लिए प्रमोटर शेयर्स को गिरवी रखकर (Pledging of Shares) बड़ी लोन लाइनें जारी करते हैं। हालांकि, भारत में आरबीआई (RBI) के नियम और फेमा (FEMA) के कानून विदेशी टैक्स हेवन के मुकाबले काफी सख्त हैं, लेकिन मूल वित्तीय इंजीनियरिंग (Asset-Backed Debt) यहाँ भी बिल्कुल समान रूप से काम करती है।
Q3: लोन पर ब्याज चुकाना अमीर लोगों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकता है? क्या यह उनकी जेब पर बोझ नहीं है?
Billionaire Real Estate Financing Secrets: Ans: कई देशों के टैक्स कानूनों में कॉर्पोरेट और व्यावसायिक रियल एस्टेट पर दिए जाने वाले ब्याज (Mortgage Interest) को व्यापारिक खर्च (Business Expense) माना जाता है। इसका मतलब यह है कि अरबपति बैंक को जो करोड़ों रुपये का ब्याज देते हैं, उसे वे अपनी कंपनियों की कुल कर योग्य आय (Taxable Income) में से घटा देते हैं। इससे उनकी कंपनियों का कॉर्पोरेट टैक्स बहुत कम हो जाता है। एक तरफ वे कम ब्याज पर लोन लेते हैं, दूसरी तरफ उस ब्याज के बहाने सरकार को टैक्स देने से बच जाते हैं, और तीसरी तरफ उनकी नकदी दूसरे बिजनेस में अधिक मुनाफा कमा रही होती है। यह ‘विन-विन-विन’ ट्रिपल बेनिफिट सिचुएशन होती है।
Q4: आम लोग अरबपतियों की इस ‘रियल एस्टेट फाइनेंसिंग’ स्ट्रेटेजी से क्या सीख सकते हैं?
Billionaire Real Estate Financing Secrets: Ans: यद्यपि एक आम आदमी को ₹100 करोड़ का SBLOC लोन नहीं मिल सकता, लेकिन इसके पीछे छिपे मूल सिद्धांत—“गुड डेट” (Good Debt) और “लीवरेज” (Leverage)—को आम लोग भी अपनी वित्तीय यात्रा में लागू कर सकते हैं। सीख यह है कि कभी भी अपनी पूरी लाइफ सेविंग्स (Life Savings) को किसी एक रियल एस्टेट में कैश के रूप में लॉक न करें। यदि आपको कम ब्याज दर पर होम लोन मिल रहा है, तो उसका उपयोग करें और अपने बचे हुए कैश को म्यूचुअल फंड्स, इंडेक्स फंड्स या अपने खुद के बिजनेस में इन्वेस्ट करें जो लोन की ब्याज दर से अधिक रिटर्न दे सके। कर्ज का इस्तेमाल लायबिलिटी (जैसे महंगी कार या छुट्टियां) के लिए नहीं, बल्कि एसेट्स (रियल एस्टेट या बिजनेस) बनाने के लिए करना ही अमीर बनने का असली नियम है।
📈 अध्याय ८: ‘बाय, बरो, डाई’ (Buy, Borrow, Die) – अमीरों का अमर वित्तीय चक्र
Billionaire Real Estate Financing Secrets: वॉल स्ट्रीट के गलियारों में अरबपतियों की इस पूरी रियल एस्टेट और एसेट फाइनेंसिंग की रणनीति को तीन शब्दों में समेटा जाता है—“Buy, Borrow, Die”। यह अमीरों का वह अमर वित्तीय चक्र है जिसके कारण वे पीढ़ियों तक बिना अपनी संपत्ति बेचे अमीर बने रहते हैं:
- Buy (खरीदें): ऐसी संपत्तियां (जैसे प्राइम रियल एस्टेट या ब्लू-चिप स्टॉक्स) खरीदें जिनकी वैल्यू समय के साथ लगातार बढ़ती है (Appreciating Assets)।
- Borrow (उधार लें): उन संपत्तियों को कभी बेचें नहीं। जब भी कैश की जरूरत हो, उनके बदले बैंकों से कम ब्याज दर पर टैक्स-फ्री लोन (Securities-Backed/Asset-Backed Loans) ले लें और अपना जीवन ठाठ से जिएं।
- Die (मृत्यु और उत्तराधिकार): जब अरबपति की मृत्यु होती है, तो उनकी संपत्ति उनके बच्चों को ट्रांसफर हो जाती है। कई देशों के कानूनों के अनुसार, वसीयत में मिलने वाली संपत्तियों पर ‘स्टेप-अप इन बेसिस’ (Step-up in Basis) के कारण पुराना कैपिटल गेंस टैक्स शून्य हो जाता है। बच्चे फिर से उन संपत्तियों पर नया लोन ले लेते हैं और यह चक्र बिना सरकार को ₹1 का टैक्स दिए सदियों तक चलता रहता है।
अध्याय ९: निष्कर्ष और अंतिम विचार (Conclusion)
Billionaire Real Estate Financing का गहन विश्लेषण यह साफ करता है कि आधुनिक पूंजीवादी व्यवस्था में ‘अमीर और अमीर क्यों होता जाता है’। यह केवल उनके अधिक काम करने के कारण नहीं है, बल्कि इसलिए है क्योंकि वे पैसे और ऋण (Debt) के नियमों को आम आदमी से बेहतर समझते हैं।
Billionaire Real Estate Financing Secrets: लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट कोई ईंट-पत्थर का बाजार नहीं है, बल्कि यह एक विशाल ‘फाइनेंशियल कमोडिटी’ बाजार है जहाँ संपत्तियों का उपयोग रहने के लिए कम और वेल्थ को पार्क करने, टैक्स बचाने तथा बैंकों से सस्ती लिक्विडिटी खींचने के लिए एक कोलैटरल के रूप में ज्यादा किया जाता है। जब तक दुनिया में प्राइवेट बैंकिंग का यह नेटवर्क और एसेट-बैक्ड लेंडिंग के ये नियम मौजूद हैं, तब तक अरबपति बिना अपनी जेब से ₹1 लगाए दुनिया की सबसे महंगी और आलीशान इमारतों के मालिक बनते रहेंगे।
“दोस्तों, क्या आपको भी लगता था कि अरबपति अपनी हवेलियां कैश देकर खरीदते हैं? अमीरों की इस ‘Buy, Borrow, Die’ और टैक्स-फ्री लोन की स्ट्रेटेजी के बारे में आपकी क्या राय है? क्या आम लोगों को भी निवेश के लिए लोन का ऐसा उपयोग करना चाहिए? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमारे साथ जरूर शेयर करें! इस मास्टर-क्लास फाइनेंस लेख को अपने सभी बिजनेस और इन्वेस्टमेंट के शौकीन दोस्तों, व्हाट्सएप ग्रुप्स और लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफाइल्स पर तुरंत शेयर करें। वित्तीय रूप से साक्षर बनें, सुरक्षित रहें! धन्यवाद।”